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गांधारी साग का छिलका (झारखंड स्पेशल) / Gandhari saag ka chilka

 

आवश्यक सामग्री:

बनाने की विधि :

चावल और उड़द के दाल को एक बाउल में लेकर कम से कम 2 बार अच्छे से धो लें।  अब इसमें पानी डालकर 6 से 7 घंटे के लिए ढककर फूलने  के लिए छोड़ दें।

 साग  के  जड़ को तोड़कर  अलग कर  लें ,  चुन कर साफ कर लें। दो  से तीन बार बड़े बरतन में ज्यादा पानी में  साग धोएं, साफ़ करें।  जिससे साग में बालू न रहे। धो कर किसी दूसरे बर्तन में निकाल कर रख लें।

  

 छः घंटे बाद चावल दाल के मिश्रण को पानी से निकालकर मिक्सी के जार में डालकर थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर पीस लें । चावल दाल के मिश्रण में ही  हमने  लहसुन ,हरी मिर्च ,जीरा , काली मिर्च डालकर पीस लिया है ।घोल गाढ़ा रखें, पतला ना करें।

आप चाहे तो लहसुन ,मिर्च ,जीरा ,काली मिर्च को अलग से पीसकर भी डाल सकते हैं । इसका पाउडर भी डालकर बना सकते हैं।

अब  साग महीन महीन  काट कर रख लें। मिश्रण के घोल में नमक, हल्दी डालकर अच्छे से मिला लें।अब उसमें कटा हुआ साग डालकर मिला दें और ढककर 5 मिनट रख दें।

 अब गैस पर तवा  रखें, गैस चालू करें, तवा गर्म होने दे ,  जब तबा गर्म हो जाए, पूरे तवा पर सरसों का तेल लगाकर, तवा पर घोल को किसी कटोरी से डालकर उसी से उसे पूरे तवे पर फैला दें।

ऊपर से एक ढक्कन से ढक दें। पांच मिनट धीमी आंच पर पकने दें ऊपर से पूरे छिलका पर तेल लगाकर इसे 5 मिनट के बाद पलट दे।

इसे मध्यम और धीमी आंच पर बनाएं। तेज आंच पर ना बनाएं यह अच्छे से उस पर पकेगा  नहीं  तुरंत जल जाएगा।मध्यम आंच पर पलट पलट कर दोनों तरफ से अच्छी तरह से इसे सेंक  ले।

इसे आप चटनी , सब्जी के साथ खा सकते हैं। प्लेन भी खा सकते हैं। बहुत ही स्वादिष्ट लगता है ये खानें में। आप सुबह का नाश्ता या रात के खाने में इसे बना सकते हैं।

मिर्च अपने स्वाद के अनुसार कम ज्यादा कर सकते हैं।

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